इग्नू की सत्रांत परीक्षा 01 जून 2026 से 21 जुलाई 2026 तक विश्वविद्यालय ने जारी किए प्रवेश पत्र -डॉ अनिल कुमार मिश्रा

परिचय सत्र को संबोधित करते हुए इग्नू मुख्यालय मैदान गढ़ी नई दिल्ली से ऑनलाइन (परास्नातक हिंदी) कार्यक्रम प्रभारी डॉ राजवंती ने हिंदी विषय की उपयोगिता के विषय में चर्चा करते हुए बताया कि साहित्य संवेदना का विषय होता है, संवेदना की जागृति हेतु साहित्य पढ़ना आवश्यक है। उपन्यास आपके जीवन जीने के तरीकों को बताता है। बदलाव कभी बाहर से नहीं बल्कि अंदर से होता है और वह तब जब कि आपके अंदर चेतना जागृत होती है जो साहित्य के माध्यम से संभव है। शिक्षा से व्यक्ति के केंद्र में विस्तार होता है, जब आप स्टडी मैटेरियल पढ़ते हैं तो लाखों लोगों से मिलते हैं क्योंकि उसमें लाखों लोगों के विचार समाहित होते हैं। एक कहानी पढ़कर जब आपको सुकून मिलता है तो सिलेबस पढ़ने से क्या मिलेगा इसको आप समझ सकते हैं। इसीलिए कहा गया है जो पड़ेगा वह अपने जीवन को गढ़ेगा।

कार्यक्रम की कन्वीनर निदेशक डॉक्टर रीना कुमारी ने बताया कि साहित्य समाज का दर्पण है, वह इसलिए क्योंकि साहित्य से संवेदना और संवेदना से समाज, समाज से सामाजिक संबंध और सामाजिक संबंध राष्ट्र के स्वरूप को प्रस्तुत करते है।
प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह ने कहां कि इग्नू का पाठ्यक्रम एवं उसकी निर्माण पद्धति विद्यार्थी के शैक्षिक संवर्धन के लिए आधारशिला का कार्य करती है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ पर्वत सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि ज्ञानवाणी, ज्ञान दर्शन और ज्ञान कोष तथा स्वयं प्रभा चैनल इग्नू के आधार स्तंभ है, जो विद्यार्थियों के शैक्षिक उन्नयन में बड़ी भूमिका का निर्माण करते हैं।

इस अवसर पर प्रोफेसर वंदना,प्रो विवेक सिंह, डॉ निशीथ नागर सहित विभिन्न शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
