बाढ़ पीडि़तों को मिली पूरी मदद नहीं हुई कोई जनहानि 

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दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सभापति डॉ. निर्मल बोले सीएम योगी की कड़ी निगरानी से हालात रहे नियंत्रित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून ने जमकर कहर बरपाया। नदियों के उफान से 43 जिले बाढ़ की चपेट में आए, जिसमें लाखों लोग प्रभावित हुए। हालांकि हालात बिगड़े जरूर, लेकिन सरकार की सक्रियता से किसी भी तरह की कोई जनहानि नहीं हुई। इस साल अब तक 116 तहसीलें, 2673 गांव और 123 शहरी वार्ड जलभराव से प्रभावित रहे। कुल 9.55 लाख से अधिक लोग बाढ़ की मार झेल चुके हैं। फिलहाल यह संख्या घटकर 2.46 लाख पर आ गई है, जिनका पूरा ख्याल सरकार रख रही है।

इस संबंध में दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सभापति एवं सदस्य विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने दूरभाष पर हुई बातचीत के दौरान बताया कि प्रभावितों के लिए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री बांटी गई है। अब तक 1,82,216 खाद्यान्न पैकेट और 10,30,534 लंच पैकेट लोगों तक पहुंचे हैं। इसके अलावा 14,740 क्विंटल पशुओं के लिए भूसा, 92,020 क्लोरीन टैबलेट पीने के पानी की शुद्धता के लिए, 3,58,555 ओआरएस पैकेट स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए वितरित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विषैले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए एंटी स्नेक वैनम और एंटी रैबिज टीकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। वहीं अब तक 774 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 637 को सहायता राशि दी जा चुकी है और बाकी को भी जल्द मदद दी जाएगी। फिलहाल स्थिति में सुधार है, लेकिन अभी भी 18 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जिनमें – बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मिर्जापुर, मुजफ्फरन

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