विश्व पर्यावरण दिवस पर महाविद्यालय ने पौध रोपण एवं इग्नू ने वेबीनार कराया


कार्यक्रम की अध्यक्षता इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने करते हुए कहा कि आज पूरे विश्व के सामने पर्यावरण एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी है। जो एक चिंतन का विषय है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण नव नालंदा महाविद्यालय नालंदा बिहार ने अपने उद्बोधन में वेद उपनिषद गीता महाभारत एवं रामायण में महर्षियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के विषय में उठाए गए कदमों पर विस्तार से चर्चा की तथा कहा कि पर्यावरण इस तरह एक सुरक्षा कवच है जिस तरह की मां के गर्भ में झिल्ली शिशु की सुरक्षा का कवच होती है। उन्होंने कहा कि हमें वैदिक संस्कृति को आत्मसात करना होगा क्योंकि आनंद के लिए आवश्यक है ज्ञान और ज्ञान प्राप्ति के लिए पर्यावरण का अनुकूल होना अति आवश्यक है। गीता कहती है अन्न से जीव और जीव प्रजन्न से और प्रजन्न धुआं अर्थात यज्ञ से उत्पन्न होता है।

निदेशक डॉ जयप्रकाश वर्मा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अनुसार 13 मिलियन प्रजातियां हैं जिनमें 1.7 मिलियन प्रजातियां को पहचाना गया किंतु आज अनेक प्रजातियां लुप्त हो रही है जो एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर ध्यान को आकर्षित कर रही है।

डॉ अनामिका सिन्हा ने कहां की वैदिक साहित्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए हमारे महापुरुषों के द्वारा अनेक दृष्टांत दिए गए यदि हम उन पर विचार करें तो इस तपती हुई धरती को बचा सकते है।

डॉ पर्वत सिंह ने कहा कि हमें सबसे पहले राष्ट्र का बोध होना चाहिए और जब हम राष्ट्र बोध से प्रेरित होते हैं तो राष्ट्र को बचाने के लिए हम हर वह प्रयास करते हैं जो आवश्यक होता है।

इस अवसर पर डॉ जितेंद्र कुमार संजय सिंह एनसीसी कैडेट्स एवं अन्य विद्यार्थी गढ़ मौजूद रहे।


