सतर्कता जागरूकता विषय पर इग्नू द्वारा वेबीनार का आयोजन

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पुखरायां कानपुर देहात कस्बा स्थित रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां कानपुर देहात में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय इग्नू अध्ययन केंद्र 27211 के समन्वयक डॉ पर्वत सिंह ने बताया कि आज इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ द्वारा भारत के प्रथम गृहमंत्री एवं राष्ट्रीय एकता के प्रतीक लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 27 अक्टूबर 2025 से 3 नवंबर 2025 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत आज “सतर्कता जागरूकता”विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने करते हुए कहा कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 की थीम “सतर्कता: हमारी साझा जिम्मेदारी”बैनर के तहत जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने हमें याद दिलाने के लिए इस थीम को सही तरीके से चुना है, कि सतर्कता कुछ लोगों का काम नहीं है- यह एक सामूहिक प्रतिबद्धता है। सतर्कता का पालन विश्वविद्यालय एवं कार्यालय के अंतर्गत कड़ाई से किया जाना चाहिए ताकि सभी पदाधिकारी समय पर विद्यार्थियों को बेहतर सहायता सेवा प्रदान कर सके।

मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ अखिलेश कुमार निगम आईपीएस( डीआईजी) उत्तर प्रदेश पुलिस लखनऊ ने अपने संबोधन में कहा कि सतर्कता सार्वजनिक कार्यालय और शक्ति के गलियारों से परे है, यह हममें से प्रत्येक को छूता है। हमारे फाइनेंशियल निर्णय को सुरक्षित करने से लेकर पक्षपात को कम करने तक, नैतिक विजिलेंस आचरण से लेकर इन्वेस्टर राइट्स प्रोटक्शन तक सतर्कता को रोजमर्रा की कार्यवाही में बनाया जाता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग किसी भी कार्यकारी अधिकारी के नियंत्रण से मुक्त तथा केंद्रीय सरकार के अंतर्गत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग का कार्य सतर्कता कार्यों की योजना बनाने, निष्पादन करने, समीक्षा करने तथा सुधार करने में सलाह देता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कैसे समाज व राष्ट्र को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए इसके लिए सीबीसी कार्य कर रही है। वर्ष 2003 में संसद में सीबीसी को वैधानिक दर्जा देने वाला एक कानून बनाया, सीबीसी भ्रष्टाचार या कार्यालय के दुरुपयोग से संबंधित है।

डॉ निगम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सतर्कता अधिष्ठान की स्थापना 1965 में हुई तब से आज तक निरंतर राजपत्रित अधिकारी एवं लोक सेवक के प्रति पूरी निष्ठा के साथ भ्रष्टाचार निवारक कार्यक्रम कर रहा है। इसके लिए हम वार्षिक सकल आय को आधार मानकर जांच कर कार्रवाई करते हैं। साइबर सुरक्षा से संबंधित टिप्स देते हुए कहा कि एटीएम नंबर, खाता संख्या व सीबी नंबर किसी को ना बताएं। आप किसी अनजान व्यक्ति से वीडियो कॉल पर बात ना करें क्योंकि एआई के माध्यम से आपका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। क्यूआर कोड हमेशा पैसा भुगतान के लिए होता है इसलिए किसी द्वारा भेजे गए कोड पर जान समझ कर ही पेमेंट करें।

कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक डॉ रीना कुमारी ने करते हुए कहा कि पारदर्शिता एवं प्रतिबद्धता का अनुसरण करके भ्रष्टाचार मुक्त समाज की स्थापना की जा सकती है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ हरीश कुमार सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार एवं नशाखोरी समाज को दीमक की तरह चट रहा है इसलिए हमें इन दोनों बीमारियों से मुक्ति पाने का प्रण लेना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में डॉ पर्वत सिंह ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि जहां आज देश को गणितीय, भारतीय टेक्निकल शिक्षा की आवश्यकता है वहीं दूसरी ओर नैतिक शिक्षा की भी नितांत आवश्यकता है। इस अवसर पर उपनिदेशक डॉ कीर्ति विक्रम सिंह, डॉ अनामिका सिन्हा, डॉ जयप्रकाश वर्मा सहायक कुल सचिव डॉ निशीथ नागर एवं विभिन्न अध्ययन केंद्रों के समन्वयक तथा विद्यार्थी गण मौजूद रहे।

 

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