नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विकसित भारत विषय पर इग्नू द्वारा कराया गया वेबीनार

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पुखरायां कानपुर देहात कस्बा के रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय इग्नू अध्ययन केंद्र एवं इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के संयुक्त प्रयास से नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विकसित भारत विषय पर वेबीनार का आयोजन कराया गया। जिसकी अध्यक्षता इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने की,मुख्य वक्ता प्रो वंदना श्रीवास्तव, कन्वीनर, निदेशक, डॉ रीना कुमारी, सह कन्वीनर प्रो नवनीत मिश्रा ब्रह्मानंद कॉलेज कानपुर एवं डॉ पर्वत सिंह रामस्वरूप ग्राम उद्योग महाविद्यालय पुखरायां रहे।

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अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि 1996 से जिस विषय में चर्चा चल रही थी, वह था विधानसभा एवं लोकसभा में महिलाओं के तैतीस प्रतिशत प्रतिनिधित्व पर जिस पर संसद द्वारा कानून बनाकर 2029 परिसीमन के उपरांत नियम को लागू करना। 

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मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो वंदना श्रीवास्तव ने बताया कि आज चर्चा का विषय अधिनियम क्या है? अधिनियम की क्या आवश्यकता है? विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका? नारी शक्ति अधिनियम लोकसभा और विधानसभा में केवल महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र नहीं बल्कि नीति निर्धारण में भागीदारी का एक अवसर है और जब महिला नीति निर्धारण में भागीदार होगी तो विकसित भारत की संकल्पना बहुत दूर नहीं क्योंकि हम यदि अपने परिवार को ले तो महिला और पुरुष मिलकर जिस विषय पर चर्चा करते हैं उसकी सफलता की संभावना अधिक होती है। डॉ आंबेडकर कहते थे “किसी देश को देखना है तो नारी की स्थिति को देखो” । यदि महिला सशक्त एवं स्वतंत्र है वह देश अधिक प्रबल होता है। लैंगिक समानता न्याय पूर्ण, प्रतिनिधित्व संविधान को सबल बनाता है एक पक्ष , प्रगति का मार्ग नहीं हो सकता जबकि आधी आबादी को नजरअंदाज कर दिया जाए।

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प्रो नवनीत मिश्रा ने कहां की नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत की प्राचीन संस्कृति को नवीन परिवेश में प्रस्तुत करता है आधी आबादी को प्रतिनिधित्व दिए बगैर हम विकास की कल्पना नहीं कर सकते।

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कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ रीना कुमारी ने कहां की सामान्यता तो संविधान कभी नारी को अधिकार से वंचित नहीं करता किंतु फिर भी यदि नीति निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो जाएगी तो भारत के विकास की गति कई गुना आगे बढ़ जाएगी।

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डॉ पर्वत सिंह ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्राचीन काल से वर्तमान तक महिलाओं का इतिहास गौरवशाली रहा है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, प्रशासन का क्षेत्र हो, अनुसंधान का क्षेत्र हो, सुरक्षा का क्षेत्र हो या फिर नीति निर्धारण का महिलाओं को जब भी अवसर मिला है पुरुषों से कभी पीछे नहीं दिखाई दी।

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इस अवसर पर सहायक कुल सचिव डॉ निशीथ नागर,प्रो सपन अस्थाना सहित विभिन्न अध्ययन केंद्र के प्राचार्य ,समन्वयक एवं विद्यार्थी गण मौजूद रहे।

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