वर्ल्ड ब्लड डोनर ऑब्जरवेशन डे पर इग्नू ने कराया वेबीनार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ हर्षवर्धन अध्यक्ष पीजीआई लखनऊ ने अपने उद्बोधन में कहा कि रक्त हमारे शरीर का एक अनमोल तत्व है, जिसे किसी कारखाने में निर्मित नहीं किया जा सकता। दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, ऑपरेशन, प्रसव तथा अन्य चिकित्सा स्थितियों में रोगियों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे समय में स्वैच्छिक रक्तदाता किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने का माध्यम बनते हैं।

डॉ पल्लवी रानी ने रक्तदान के महत्व पर चर्चा करते हुए भारत एवं विश्व में रक्तदाताओं की संख्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की आवश्यकता के सापेक्ष रक्तदाता की संख्या अपेक्षाकृत कम है जिससे अनेक लोगों को बचाए जा पाना संभव नहीं हो पाता, जन जागरूकता के माध्यम से रक्तदाताओं की संख्या में वृद्धि करनी है आज इसी उद्देश्य से रक्तदाताओं के प्रति सेलिब्रेट करने का हमें अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही कहा कि रक्तदान के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि एक यूनिट रक्त कई लोगों की सहायता कर सकता है क्योंकि रक्त के विभिन्न घटकों—जैसे लाल रक्त कण, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स—का अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही रक्तदान करने से समाज में सहयोग, परोपकार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है। साथ ही काफी भारत में प्रत्येक 10 में एक व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता पड़ती है इसलिए रक्तदाता का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

कार्यक्रम की कन्वीनर डॉ अनामिका सिन्हा ने संचालन करते हुए कहा कि समाज में रक्तदान से जुड़े कई भ्रम भी पाए जाते हैं, जैसे रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है। जबकि स्वस्थ व्यक्ति चिकित्सकीय जाँच और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है और शरीर कुछ समय में इसकी पूर्ति कर लेता है।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए अध्ययन केंद्र 27211 के समन्वयक डॉ पर्वत सिंह ने बताया कि रक्तदान जैसे जीवन रक्षक पुनीत कार्य में विशेषकर युवा वर्ग आगे आए और नियमित स्वैच्छिक रक्तदान को एक सामाजिक आंदोलन बनाए। क्योंकि “एक बूंद रक्त नहीं, किसी के जीवन की आशा है”।

इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक डॉ रीना कुमारी, डॉ जयप्रकाश वर्मा, सहायक कुल सचिव डॉ निशीथ नागर सहित विभिन्न अध्ययन केंद्र के समन्वयक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
