‘हिंदी की दिशा एवं दशा’ पर मंथन, पुखरायां कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता एवं संगोष्ठी

महाविद्यालय प्रबंध समिति के मंत्री प्रबंधक श्री श्रीप्रकाश द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी हमारी गौरव की भाषा है हमारी संस्कृति है हमारी पहचान है इसलिए हमें हिंदी के महत्व को समझना होगा।
हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार ने कहा कि आज के कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, रचनात्मक लेखन की क्षमता तथा हिंदी के वर्तमान स्वरूप, उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। निबंध लेखन प्रतियोगिता में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और हिंदी भाषा के समक्ष वर्तमान चुनौतियों तथा उसके विकास की संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

डॉ निधि अग्रवाल ने कहा कि हिंदी केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और सामाजिक चेतना की महत्वपूर्ण संवाहक भाषा है। डिजिटल युग में हिंदी का स्वरूप तेजी से विस्तार पा रहा है। सोशल मीडिया, इंटरनेट, शिक्षा, पत्रकारिता तथा तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी के बढ़ते प्रयोग को भाषा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया गया। साथ ही विद्यार्थियों से हिंदी के शुद्ध, प्रभावी एवं रचनात्मक प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।

संगोष्ठी का संचालन करते हुए इग्नू समन्वयक डॉ पर्वत सिंह ने कहा कि भाषा से हमारी पहचान है, अपनी पहचान को प्रबल बनाने के लिए अपनी भाषा को सबल बनाना अति आवश्यक है। इसलिए हम दैनिक जीवन में हिंदी लेखन व संभाषण में अधिक से अधिक प्रयोग करें।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने हिंदी की वर्तमान स्थिति, वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता तथा तकनीकी युग में हिंदी की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने की घोषणा भी की गई।
कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग द्वारा सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया। हिंदी दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति गौरव, प्रेम और रचनात्मक चेतना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

इस अवसर पर प्रोफेसर सविता गुप्ता, डॉ रमणीक श्रीवास्तव, डॉ अंशुमान उपाध्याय, डॉ इदरीस खान, डॉ शिवनारायण यादव, संजय सिंह आदित्य आदि मौजूद रहे।
