इग्नू बना देश का पहला विश्वविद्यालय, शुरू की M.Sc. Climate Change

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पुखरायां कानपुर देहात कस्बा स्थित रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय इग्नू अध्ययन केंद्र 27211के समन्वयक डॉ पर्वत सिंह ने बताया कि इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की वर्तमान में जुलाई 2026 सत्र की प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा रही है जिसमें 330 से अधिक ODL मोड के कार्यक्रम और 44 ऑनलाइन मोड के कार्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी https://ignouadmission.samarth.edu.in/  लिंक के माध्यम से 15 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसी सत्र में विश्वविद्यालय ने जलवायु परिवर्तन में दो वर्षीय एमएससी क्लाइमेट चेंज कार्यक्रम शुरू किया है।

डॉ सिंह ने कहा कि इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि जुलाई 2026 सत्र में विश्वविद्यालय ने सबसे जरूरी ग्लोबल चुनौतियों में से एक जलवायु परिवर्तन विषय पर विज्ञान परास्नातक कार्यक्रम आरम्भ किया है। इसका मकसद विद्यार्थियों को क्लाइमेट साइंस, क्लाइमेट रिस्क, अनुकूलन और शमन, जल-संसाधन, कृषि आपदा, जैव विविधता संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण कानून, पर्यावरण गवर्नेंस और सतत विकास जैसे विषयों का ज्ञान प्रदान करना है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, स्मार्ट सिटी, स्मार्ट गांव विषय को भी इसमें सम्मिलित किया गया है। डॉ. मिश्र ने बताया कि इग्नू इस कार्यक्रम को आरम्भ करने वाला प्रथम विश्वविद्यालय बन गया है।

क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनामिका सिन्हा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन में परास्नातक में प्रवेश लेने हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों का किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना आवश्यक है। यह कार्यक्रम न्यूनतम 2 वर्ष की एवं अधिकतम 4 वर्ष की समयावधि का है। यह कार्यक्रम अंग्रेजी भाषा में ही उपलब्ध है। यह कार्यक्रम 80 क्रेडिट का है तथा प्रथम वर्ष के 40 क्रेडिट को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज की डिग्री प्राप्त करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनामिका सिन्हा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन में परास्नातक में प्रवेश लेने हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों का किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना आवश्यक है। यह कार्यक्रम न्यूनतम 2 वर्ष की एवं अधिकतम 4 वर्ष की समयावधि का है। यह कार्यक्रम अंग्रेजी भाषा में ही उपलब्ध है। यह कार्यक्रम 80 क्रेडिट का है तथा प्रथम वर्ष के 40 क्रेडिट को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज की डिग्री प्राप्त करने का विकल्प भी उपलब्ध है। 

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह ने कहा कि इग्नू द्वारा जलवायु परिवर्तन में विज्ञान परास्नातक विषय वर्तमान समय के लिए बहुत ही सार्थक एवं उपयोगी पहल है, जिसको करने से जलवायु में हो रहे परिवर्तन की समझ विद्यार्थियों के अंदर पैदा होगी, जिससे आने वाली गंभीर चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी।

 

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