हेल्दी लाइफस्टाइल में योग की भूमिका विषय पर इग्नू ने कराया वेबीनार

मुख्य वक्ता प्रो. टी. ओनिमा अध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा विभाग, हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग का अर्थ है “जोड़ना”अर्थात् शरीर, मन और आत्मा का समन्वय। भारतीय ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले योग की जिस परंपरा का विकास किया, वह आज पूरे विश्व में स्वास्थ्य और कल्याण का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। साथ ही कहा कि “भगवत गीता” में कर्म की कुशलता को ही योग कहा गया। महर्षि पतंजलि ने मन चित्त एवं विचारों को शांत करना ही योग माना।हेल्दी लाइफस्टाइल में योग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है। मांसपेशियों एवं हड्डियों को सुदृढ़ करता है।हृदय, फेफड़ों तथा पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसीजीवनशैली संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायता करता है।एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है।सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का विकास करता है।भावनात्मक संतुलन क्रोध, भय और तनाव जैसी नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण विकसित करने में मदद करता है। स्वस्थ दिनचर्या का निर्माण योग हमें समय पर उठने, संतुलित आहार लेने, पर्याप्त नींद लेने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करता है। यही एक स्वस्थ जीवनशैली का आधार है।

कार्यक्रम की कन्वीनर एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ रीना कुमारी ने संचालन करते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग का वर्णन किया है।जिसमें यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान,समाधि
इन आठ अंगों का नियमित अभ्यास व्यक्ति के व्यक्तित्व का समग्र विकास करता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह ने कहा कि दैनिक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन 20–30 मिनट योग और प्राणायाम करना चाहिए।संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लें।पर्याप्त नींद लें।ध्यान एवं सकारात्मक सोच का अभ्यास करें।नशे और अन्य हानिकारक आदतों से दूर रहें।

कार्यक्रम के अंत में डॉ पर्वत सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि योग हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है यदि हम इसको नजरअंदाज करेंगे तो निश्चित समझो अपने पतन का कारण बनेंगे, और यदि हम प्रतिदिन योग करेंगे तो हम उन्नति के मार्ग को प्रशस्त करेंगे। योग केवल रोगों से बचने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन जीने की कला है।

इस अवसर पर निदेशक डॉ अनामिका सिन्हा, डॉ जयप्रकाश वर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ निशीथ नागर सहित विभिन्न अध्ययन केंद्र के समन्वयक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
