डिजिटल एवं एआई के युग में हिंदी भाषा का महत्व एवं चुनौतियों पर इग्नू का ऑनलाइन वेबिनार

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पुखरायां कानपुर देहात कस्बा के रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां कानपुर देहात में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र समन्वयक ने बताया कि आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) द्वारा “डिजिटल एवं एआई के युग में हिंदी भाषा का महत्व एवं चुनौतियां” विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी भाषा की संभावनाओं, उपयोगिता तथा समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी के प्रयोग का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। तकनीकी विकास के साथ हिंदी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर वंदना श्रीवास्तव, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, के.के.सी. कॉलेज, लखनऊ रहीं। उन्होंने डिजिटल माध्यमों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में हिंदी भाषा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी के व्यापक विकास के लिए तकनीकी संसाधनों के साथ भाषा की समृद्ध परंपरा और मौलिकता को भी संरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने डिजिटल कंटेंट, सोशल मीडिया और एआई आधारित तकनीकों में हिंदी की बढ़ती संभावनाओं पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम की संयोजक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रीना कुमारी रहीं। उन्होंने वेबिनार के उद्देश्य एवं विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया।

 

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह आधुनिक युग ए आई का योग है जिसमें व्यक्ति को एआई का सही तरीके से प्रयोग करते हुए अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करना है।जिसमें यदि हम हिंदी को बढ़ावा देंगे तो निश्चित रूप से भाषा की व्यापकता भी बढ़ेगी।

कार्यक्रम के अंत में इग्नू अध्ययन केंद्र 27211 के समन्वयक डॉ. पर्वत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने वक्ताओं, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल एवं एआई के वर्तमान दौर में हिंदी को तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस अवसर पर निदेशक डॉ अनामिका सिन्हा, डॉ जयप्रकाश वर्मा, सहायक कुल सचिव डॉ निशीथ नागर सहित विभिन्न अध्ययन केंद्र के समन्वयक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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