भारत की पहली मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर खेला मैच

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उत्तर प्रदेश, जुलाई 2025: भारत की मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम ने इस सप्ताह इतिहास रच दिया, जब टीम पहली बार लॉर्ड्स के मैदान पर उतरी। वर्तमान में चल रही सीरीज़ के तहत यह मैच ऐसी टीम के साथ खेला गया, जो तकरीबन आठ सालों से मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट खेल रही है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारत ने विश्वस्तरीय मंच पर इस फॉर्मेट में आधिकारिक प्रवेश कर लिया है।

इस अवसर पर स्वयं की संस्थापक चेयरपर्सन सुश्री स्मिनु जिंदल को इंग्लैण्ड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड द्वारा आयोजन स्थल पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया गया। सात क्रिकेट बोर्ड्स के अधिकारियों के समक्ष भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने न सिर्फ सुगम्यता, बल्कि अवसरों एवं पारदर्शिता के संदर्भ में भी समावेशी खेल नियोजन के लिए मजबूत प्रयासों का आह्वान किया।

 

जिंदल ने कहा, “लॉर्ड्स में जो कुछ भी हो रहा है, वह आकस्मिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक है। इस मैदान ने क्रिकेट के सबसे बेहतरीन पलों को देखा है। आज यह समावेशन को देख रहा है।”

 

खेलों में डीसीसीआई के साथ स्वयं की साझेदारी 2021 में शुरू हुई, इस साझेदारी के तहत कई आयोजन किए जा चुके हैं। पिछले सालों के दौरान यह टोकियो पैरालिम्पिक्स से लेकर पीडी चैम्पियनशिप और खेलो इंडिया पैरा गेम्स जैसे आयोजनों तक लगातार विकसित हुई है।

 

यह टूर्नामेन्ट डिसेबिलिटी क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीसीआई) के सालों के अथक प्रयासों का परिणाम है, जिसने शारीरिक, बौद्धिक एवं श्रवण दिव्यांगता से युक्त खिलाड़ियों के साथ मिलकर काम किया है। लॉर्ड्स के मैदान पर टीम का उतरना भारत की मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह एक ऐसा फॉर्मेट है, जिसे मुख्यधारा में लाने के लिए हमें लम्बी दूरी तय करना है, हालाँकि इसमें करियर की ढेरों संभावनाएँ हैं।

भारतीय मैन्स क्रिकेट टीम इंग्लैण्ड का दौरा भी कर रही है। दोनों स्क्वैड्स विभिन्न फॉर्मेट्स में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य सीरीज़ जीतना और समावेशन को बढ़ावा देना है। वे एक साथ मिलकर विश्वस्तरीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

 

अपने भाषण के दौरान जिंदल ने ऐलान किया कि स्वयं इसी नवंबर में एक्सेसिबल स्पोर्ट्स एण्ड टूरिज्म पर भारत के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भी करेगा। इस सम्मेलन में नीति, खेल, आतिथ्य एवं दिव्यांगता से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा लेकर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। यह खासतौर पर इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स एवं 2036 ओलम्पिक्स की तैयारियों में जुटा है।

 

स्वयं और डीसीसीआई के लिए लॉर्ड्स का यह पल न सिर्फ एक बड़ी उपलब्धि बल्कि एक लम्बी यात्रा है। एक ऐसी यात्रा जिसका उद्देश्य हर प्रकार के खिलाड़ियों के लिए, हर प्रकार के पिच पर खेलों को सुगम्य बनाना है।

 

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