महाविद्यालय एवं इग्नू ने संयुक्त रूप से नशा मुक्ति हेतु संगोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम किया

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पुखरायां कानपुर देहात कस्बा के रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय एवं एनसीसी कैडेट्स द्वारा संयुक्त रूप से संगोष्ठी एवं नशा मुक्ति हेतु शपथ कराई गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षता इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने करते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का संकल्प युवाओं के अंदर बढ़ती हुई नशा प्रवृत्ति को रोकना और धीरे-धीरे पूर्णतया समाप्त करना है क्योंकि जब तक युवा शिक्षित एवं सशक्त नहीं होगा तब तक देश के विकसित होने की संकल्पना केवल एक सपना होगी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता श्री प्रवीण कुमार खत्री, मनोचिकित्सक ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज चिकित्सक के रूप में मैं प्रतिदिन ऐसे लोगों से मिलता हूँ जिनका जीवन नशे की लत के कारण बिखर चुका है। अधिकांश लोग शौक, जिज्ञासा, तनाव, मित्रों के दबाव या क्षणिक आनंद के लिए नशा शुरू करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे वही आदत उनके व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य पर नियंत्रण कर लेती है।

नशा केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है, स्मरण शक्ति घटती है, चिंता और अवसाद बढ़ते हैं तथा व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो जाता है। कई बार यह स्थिति हिंसा, अपराध, सड़क दुर्घटनाओं और आत्मविनाशकारी व्यवहार तक पहुँच जाती है।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ अनामिका सिन्हा ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि विद्यार्थियों, याद रखिए कि नशे का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग बनता है। इसलिए यदि कोई मित्र आपको नशा करने के लिए प्रेरित करे, तो दृढ़ता से “ना” कहें। सच्चा मित्र वही है जो आपको सही दिशा दिखाए, गलत आदतों की ओर न ले जाए।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले से नशे की लत से जूझ रहा है, तो उसे अपराधी या बुरा व्यक्ति मानने के बजाय उसे सहानुभूति, सहयोग और उचित उपचार की आवश्यकता होती है। समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श, परिवार का सहयोग और चिकित्सकीय उपचार से अधिकांश लोग इस लत से बाहर निकल सकते हैं।

एनसीसी प्रभारी लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार ने नशे से बचने के लिए कहां की हमें कुछ सकारात्मक आदतें अपनानी चाहिए—नियमित व्यायाम और योग, खेल-कूद, संगीत, पुस्तक-पठन, ध्यान, अच्छे मित्रों का साथ तथा परिवार के साथ खुलकर संवाद। तनाव होने पर नशे का सहारा लेने के बजाय किसी विश्वसनीय व्यक्ति या विशेषज्ञ से बात करें।

आइए, हम सभी आज यह संकल्प लें

हम स्वयं किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे।

अपने परिवार और मित्रों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।

नशा-मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोग देंगे।

आवश्यकता पड़ने पर नशे से जूझ रहे व्यक्ति को उपचार और परामर्श के लिए प्रेरित करेंगे।

अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि नशे से बड़ी कोई जीत नहीं और स्वस्थ जीवन से बड़ा कोई धन नहीं। आइए, हम एक स्वस्थ, जागरूक और नशा-मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लें।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ पर्वत सिंह ने कहा कि हमें ऐसे किसी भी नशे से दूर रहना है जो कि हमें दुर्बल बनाते हैं। क्योंकि किसी परिवार में एक भी व्यक्ति यदि शराब आदि का सेवन करने लगता है तो वह पूरा परिवार कालांतर में बिखरा हुआ दिखाई देता है। इसके अनेक उदाहरण समाज में प्रतिदिन देखने को मिलते हैं। इसलिए हम राष्ट्र के प्रति जवाब देने नशा जैसी बुरी लतों से दूर रहे। इस अवसर पर इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ से ऑनलाइन रूप में क्षेत्रीय निदेशक डॉ रीना कुमारी, डॉ जयप्रकाश वर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ निशीथ नागर एनसीसी कैडेट्स निर्दोष कुमार पूजा प्रतिभा संध्या आंचल विनोद विवेक सौरभ हिमांशु आदि ने उपस्थित रहकर अपने जीवन में नशा न करने की प्रतिज्ञा ली।

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