नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत, साहित्य और संस्कार का दिया संदेश

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पुखरायां कानपुर देहात कस्बा के रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां कानपुर देहात में आज दीक्षारंभ प्रेमचंद और मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य में राष्ट्र, संस्कृति एवं समकालीन प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी के साथ संपन्न।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ राजेश कुमार यादव सहायक आचार्य तिलक महाविद्यालय औरैया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह ने करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि एक ओर हम नवप्रवेशित विद्यार्थियों का इस शैक्षणिक परिवार में हार्दिक स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हम हिंदी साहित्य के दो महान स्तंभ—मुंशी प्रेमचंद और मैथिलीशरण गुप्त—के साहित्य की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विचार करने के लिए एकत्रित हुए हैं।दीक्षारंभ केवल एक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण की दिशा में पहला कदम है।

अतिथियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए प्रोफेसर सविता गुप्ता ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति में साहित्य हमारी सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति है।

  डॉ राजेश कुमार ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने साहित्य में भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने किसान, मजदूर, महिला, दलित, वंचित और सामान्य जनजीवन की समस्याओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया। उनका साहित्य हमें सिखाता है कि समाज की उन्नति तभी संभव है जब न्याय, समानता, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च स्थान दिया जाए। आज जब समाज अनेक सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब प्रेमचंद की रचनाएँ हमें सही दिशा दिखाती हैं।

दूसरी ओर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक चेतना, नारी सम्मान, कर्तव्यपरायणता और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। उनकी प्रसिद्ध पंक्ति—

“हम कौन थे, क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी।”

आज भी हमें आत्मचिंतन और आत्मविकास की प्रेरणा देती है। उनका साहित्य भारतीय संस्कृति की आत्मा को अभिव्यक्त करता है और युवाओं में राष्ट्रनिर्माण की भावना जागृत करता है।

कार्यक्रम के संयोजक हिंदी विभाग अध्यक्ष कैप्टन जितेंद्र कुमार ने विषय का प्रवर्तन करते हुए कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और वैश्वीकरण के इस युग में ज्ञान के स्रोत बढ़े हैं, लेकिन जीवन मूल्यों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। प्रेमचंद हमें सामाजिक संवेदनशीलता सिखाते हैं और मैथिलीशरण गुप्त हमें राष्ट्र एवं संस्कृति के प्रति समर्पण का संदेश देते हैं। यही कारण है कि उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

सहायक आचार्य डॉ निधि अग्रवाल ने अपने संबोधन में मैथिलीशरण गुप्त की रचनाओं में महिला विमर्श पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुप्त ने साकेत के माध्यम से उर्मिला के साहस को जिस तरह प्रदर्शित किया है, वास्तव में आज की प्रगतिशील महिला के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।

महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री प्रताप नारायण अग्रवाल ने नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए शुभकामना संदेश प्रेषित करते हुए कहा कि मैं आप सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों से आग्रह करता हूँ कि पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ महान साहित्यकारों की रचनाओं का भी नियमित अध्ययन करें। ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रहित से जुड़ जाए।

महाविद्यालय प्रबंधन समिति के मंत्री प्रबंधक श्री श्रीप्रकाश द्विवेदी ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि-

आइए, हम संकल्प लें कि हम शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का साधन बनाएँगे। प्रेमचंद की सामाजिक चेतना और मैथिलीशरण गुप्त के राष्ट्रवादी आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर हम एक विकसित, समृद्ध और संवेदनशील भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँगे।

कार्यक्रम का संचालन इग्नू समन्वयक डॉ पर्वत सिंह ने करते हुए नव प्रवेशित विद्यार्थियों को दोनों साहित्यकारों से प्रेरणा लेने की सलाह दी तथा नियमित पुस्तकालय के प्रयोग करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के अंत में डॉ अंशुमान उपाध्याय ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दिया।

इस अवसर पर डॉ प्रबल प्रताप सिंह तोमर, डॉ रविंद्र सिंह, डॉ रमणीक श्रीवास्तव, डॉ इदरीश खान, संजय सिंह, आदित्य, सुनील, इंद्रजीत ,अरुणा सहित नव प्रवेशित विद्यार्थी एवं एनसीसी कैडेट्स मौजूद रहे।

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